This tradition is a foundational source for the theory of Kundalini Yoga and popularized the early five and seven chakra systems used today.

—the "Hunchbacked Goddess" who symbolizes the coiled energy of

कुब्जिका तंत्र का उदय लगभग 7वीं से 9वीं शताब्दी के दौरान हिमालयी क्षेत्रों और कश्मीर घाटी में हुआ था। 12वीं शताब्दी तक यह मत अपने चरम पर था, लेकिन धीरे-धीरे यह मुख्यधारा के तंत्र से ओझल होता गया। वर्तमान में, यह परंपरा मुख्य रूप से में जीवित है, जहाँ इसे अत्यंत गुप्त रखा जाता है।

भारतीय तांत्रिक साहित्य में कई ऐसे ग्रंथ हैं जो अत्यंत गोपनीय और दुर्लभ माने जाते हैं। उन्हीं में से एक है । यह कश्मीर शैववाद और कौल तंत्र परंपरा का एक प्रमुख और शक्तिशाली ग्रंथ है। जहाँ अधिकांश लोग वामाचार, दक्षिणाचार या श्रीविद्या से परिचित हैं, वहीं कुब्जिका तंत्र एक विशिष्ट स्थान रखता है। यह देवी कुब्जिका (टेढ़ी या वक्रा) की उपासना पर केंद्रित है, जो त्रिपुरा सुंदरी का ही एक गूढ़ रूप मानी जाती हैं।

Kubjika Tantra Kubjikamata Tantra ) is one of the most secretive and profound scriptures of the Pascimamnaya

The tradition, known as the (Western Transmission), moved from the Himalayas and Kashmir into Nepal roughly around the 11th or 12th century.