Ziyarat E - Nahiya In Hindi

: Unlike shorter Ziyarats, this text provides a vivid, heart-wrenching account of the suffering of Imam Hussain (a.s.) and his family. In Hindi/Urdu translations, the use of emotive vocabulary often helps local readers connect more deeply with the Masaib (afflictions).

ज़ियारत-ए-नाहिया केवल एक दुआ नहीं, बल्कि इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके अहलेबैत (अ.स.) से जुड़ी सबसे दर्दनाक और सच्ची शोक अभिव्यक्तियों में से एक है। यह इमाम ज़माना (अ.त.फ.श.) से भावनात्मक रूप से जुड़ने का एक ज़रिया है, और इसे पढ़ने से इंसान का दिल मासूमों के दर्द से और ज़ालिमों के अत्याचार से नफरत से भर जाता है। ziyarat e nahiya in hindi

'ऐ मेरे नाना! अगरचे ज़माने की दूरी ने मुझे आपसे दूर रखा और मैं उस दिन आपकी मदद न कर सका, लेकिन मैं सुबह और शाम आपके ग़म में रोता हूँ। और अगर मेरी आँखों के आँसू ख़त्म हो जाएँगे, तो मैं आँसुओं की जगह अपनी आँखों से ख़ून बहाऊँगा!' : Unlike shorter Ziyarats, this text provides a

ज़ियारत-ए-नाहिया कोई साधारण दुआ नहीं है, बल्कि यह वह दर्दनाक ज़ियारत है जो बारहवें इमाम, इमाम महदी (अ.स.) से हम तक पहुँची है। इसमें उन्होंने कर्बला के मैदान में अपने पूर्वज इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके वफादार साथियों की शहादत का ऐसा आंखों देखा और रोंगटे खड़े कर देने वाला मंज़र बयान किया है, जो किसी भी इंसान की आँखों में आँसू ला दे। : Unlike shorter Ziyarats

कुछ लोग गलती से इसे 'नाहिया' की बजाय 'नाहिया' (लंबी आवाज के साथ) पढ़ते हैं, जिसका अर्थ "हल्के क्षेत्र" होता है। ध्यान रखें: का अर्थ है - 'तरफ' या 'दिशा', यानि दूर से अरज़ की गई ज़ियारत।

ज़ियारत-ए-नाहिया सिर्फ एक प्रार्थना नहीं है, यह इमाम हुसैन (अ.स.) को लिखा गया एक प्रेम-पत्र है। यह वो आवाज़ है जो कर्बला के मैदान से नहीं, बल्कि शाम-ए-गरीबां (असीरों का काफिला) से निकली थी। जो कोई भी इसे दिल से समझता है, वह कर्बला को अपनी आँखों से देख लेता है।