उस रात, रिया ने महसूस किया कि दुनिया में चाहे कितनी भी भीड़ क्यों न हो, एक माँ का आँचल ही वह सुकून है जहाँ पहुँचकर हर चिंता खत्म हो जाती है। माँ और बेटी का यह रिश्ता सिर्फ खून का रिश्ता नहीं, बल्कि दो रूहों का अटूट संगम था, जहाँ शब्द कम और एहसास ज़्यादा मायने रखते थे।
आरती को यह बदलाव पसंद नहीं आया और वह अपनी माँ से दूर होने लगी। वह अपने दोस्तों के साथ समय बिताने लगी और अपनी माँ से बात करना बंद कर दिया। शोभा ने आरती को समझने की कोशिश की, लेकिन वह असफल रही। mom with daughter story antarvasna hindi
माँ और बेटी की अनंत यात्रा (Maam aur Beti ki Anant Yatra) mom with daughter story antarvasna hindi
समीरपुर की सुहानी सुबह में जब धूप खिड़की से छनकर आती, तो माया जी अक्सर अपनी बेटी रिया को सोते हुए देखती थीं। रिया अब वह छोटी बच्ची नहीं रही थी जो उनकी उँगली पकड़कर चलती थी; वह अब शहर की एक बड़ी कंपनी में काम करने वाली एक स्वतंत्र महिला बन चुकी थी। लेकिन एक माँ के लिए उसकी संतान कभी बड़ी नहीं होती। mom with daughter story antarvasna hindi