विवाद और सेंसरशिप: रिलीज़ के समय से ही फ़िल्म पर व्यापक विरोध और सेंसरशिप रहे हैं—कई देशों में इसे प्रतिबंधित किया गया, कुछ स्थानों पर कट्टे गए संस्करण ही दिखाए गए। आलोचकों ने इसे पोर्नोग्राफ़िक, भद्दा और हिंसक बताया; जबकि समर्थकों ने पाज़ोलिनी की रचनात्मक साहस और राजनीतिक आलोचना की प्रशंसा की। आज भी यह फिल्म फ़िल्मशिक्षा और कला-समालोचना में नाटकीय और विवादास्पद अध्ययन-विषय बनी रहती है।
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The protagonists are four wealthy, powerful men representing different facets of fascism: भद्दा और हिंसक बताया